Tuesday, December 25, 2012

विजेंद्र गुप्ता राजनीती में खेलभावना के पक्षधर

आरती त्रिपाठी,14 अप्रेल दिल्ली:- भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता अनेको अनेक कार्यक्रम  करके बेजान पड़ी भाजपा में जान फुकने में लगे है। बी वि पि में कहते है की कार्यक्रम से कार्यकर्ता निर्माण होता हैतीन तरह के कार्यकर्म एक संगठन को सही रूप में खड़ा करने के लिए जरुरी है संग्त्नात्मक,रचनात्मक,आंदोलनात्मक, जिस संगठन में ये होते रहे वह संगठन गतिवान है


विजेंद्र गुप्ता तीनो ही तरह के कार्यक्रम  एक साथ करवाकर अपने कोशल का परिचय राष्ट्रिय नेताओ और दिल्ली की जनता  को दे रहे है, मंडल अभ्यास वर्ग (संगठनात्मक ) , दिल्ली की समस्याओ धरना प्रदर्शन (आंदोलनात्मक)और डॉ भीम राव आंबेडकर क्रिकेट टूर्नामेंट का भव्य आयोजन (रचनात्मक )..... भाजपा में  युवाओ को नयी स्फूर्ति देने वाले  कार्यक्रम बने  ।
दिसम्बर 2010 को दिल्ली के पश्चिमी जिले से डॉ भीमराव आंबेडकर क्रिकेट टूर्नामेंट का प्रदेश में शुभारम्भ हुआ उस समय सोचा नहीं था की यह टूर्नामेंट दिल्ली में लाखो लोगो तक राजनीती में खेल भावनाओ को पहुचायेगा और करीब 10000 नए युवाओ को बीजेपी की युवा शाखा से जोड़ने वाला सिद्ध होगाइसका प्रदेश भर का काम सोपने में भा ज पा ध्यक्ष ने महामंत्री युवा मोर्चा श्री गजेन्द्र  यादव पर विश्वास जताया

बकोल गजेन्द्र यादव-अध्यक्ष जी ने टूर्नामेंट का काम दिया जो एक दम नया काम था पर साथ ही मेरे लिए सिखने समझने का मोका था 272 मंडल में जाकर टी बनवाकर उनमे मैच करना और प्रदेश तक लाना एक बड़ा काम था लेकिन हमारी टीम उसे पूरा करने को बेताब थी
टूर्नामेंट 6 दिसम्बर , डॉ बाबा साहेब के निर्वाण दिवस से शुरू करके उनके जन्म दिवस 14अप्रेल को समापन ऐसी योजना बनायीं गयी। 4 महीने 8 दिन का लम्बा समय मिला , पर देखते ही देखते ये समय कम लगने लगासभी जिलो के शुभारम्भ मैच करने के लिए एक एक जिले में कई बार बैठको में जाना शुरू हुआनया कार्यक्रम  होने के कारण अधिक समय जिला अध्यक्षों को समझाने में लगा की यह कैसे होगा, और जैसे ही दिल्ली में पहला प्रचार शुरू हुआ मानो  दिल्ली का युवा इस टूर्नामेंट को हाथो हाथ लेने के लिए तैयार बैठा हो  ऐसा लगा मानो विजेंद्र गुप्ता ने जैसे दिल्ली के युवाओ की सलाह से ही शुरू करने की योजना बनायीं हो

शुभारम्भ के बाद सभी जिलो से लगातार टीम के लिए सामान्य युवाओ का फोने लगातार आना दिनों दिन फोन का सिलसिला बढने  लगास्कुल,कोलेज,प्रोफेशनल क्लब-खिलाडी, सभी के फोन आते देख हमारी ख़ुशी का ठिकाना रहा , हमने  विजेंद्र जी को बधाई दी की ये टूर्नामेंट दिल्ली में सबसे बड़ा टूर्नामेंट बनने जा  रहा है.... उनका जवाब मै जनता थाहमारे मार्ग दर्शक के रूप में श्री चेतन चोहान जी (पूर्व संसद एवं डी डी सलेक्टर ) को साथ लगाया और बाद में एक और क्रिकेट परिवार से और नेत्री पूनम आजाद को साथ लगाया इन दोनों का ही साथ पाकर हमें होसला मिला और फिर शुरू हुआ क्रिकेट का महासंग्राम ......... मंडल के भी मैच को देखने सैंकड़ो की संख्या में लोग आने लगे तथा  सभी विचारधारा  के युवा मैच में खेलते थेअच्छी बात यह थी की और सभी कार्यक्रमों में लोगो को बुलाना पड़ता था पर इसमें तो लोग खुद पूछते थे की अगला मैच कब होगा लोग मैचो का इंतजार करने लगे थे और तो और जो जिले अभी तक शुभारम्भ नहीं करवा पाए थे उनके नेताओ से लगातार फोन करके पूछने लगे थे ........सच तो यह है की कई जिलो में  लोगो के लगातार बढते फ़ोनों के कारण अपने यंहा शुभारम्भ  की तिथि रख दी थी। जैसे जिला अध्यक्ष  सचिन मित्तल और अशोक भारद्वाज,मुकेश गोयल, ने कहा हमें फोन इतने रहे है की जीना मुश्किल हो गया है हम खुद ही शुभारम्भ की तिथि रख देते है ।

एक एक करके पूरी दिल्ली में 384 टीमो का गठन हुआ जिसका बिलकुल व्यवसायिक क्रिकेट का रूप देने के लिए बाकायदा न्यूज पेपर में ऐड दिए गए .. डी डी सी ए की एम्पायर टीम को अनुबंधित किया गया और दिल्ली विश्वविधालय का श्यामलाल कॉलेज ग्राउंड सेमी फाइनल तथा फाइनल मैच के लिए किराये पर 15 दिनों के लिए लिया गया ।
 प्रथम पुरस्कार 51000, द्वितीय पुरस्कार 31000, एवं तृतीय पुरस्कार 21000 रखा गया
और मैन ऑफ़ दा मैच को एक हीरो हौंडा की मोटर साईकल भी दी गयी

Thursday, April 22, 2010

मंहगाई रेली - मुह छुपता मीडिया

२१ अप्रेल २०१० -दिल्ली में एक एतिहासिक कार्यकर्म हुआ नाम रहा ''मंहगाई रेली -संसद चलो'' देखते ही देखते गडकरी जी के आव्हान पर भारी संख्या में जो लगभग लाखो में रही स्टार ने लाख बताई और दूरदर्शन ने ३-५० लाख मुझे गर्व है दूरदर्शन के अधिकारियो पर जिनको ३-५० लाख लोग दिखयी दे गए वर्ना ये अगर इंदिरा जी के राज में होता तो शायद उन्हें रेली भी नहीं दिखाई देती ?शायद इस काम में सोनिया और कोंग्रेस दोनों पीछे रह गए और अब शामत आई होगी दूरदर्शन वालो की आखिर सरकारी चैंनल जो है मिनिस्टरो से डांट खानी पड़ी होगी बेचारो को की ३-५० लाख लोग शामिल हो गए ये भी क्यों बताया गया ......
मै बधाई देता हु स्टार को जिसने हिम्मत करी जनता की पीड़ा सुनने की कम - से कम ५ लाख लोग इक्कठे हुए ये बताया तो नहीं तो और चैनलों में तो हिम्मत ही नहीं थी सच को सच कहने की अंधे हो जाते है सारे जब भी बी जे पी का कोई सफल कार्यकर्म हो.........हो भी क्यों न सारा का सारा मीडिया सरकार से करोडो के ऐड लेने में जो लगा है और मुझे सिर्फ ऐड का मामला नहीं लगता उससे जरा हट कर कहू तो सारा मीडिया है ही या तो कोंग्रेसी या वामपंथी ...
मित्रो मेरी बात पर गोर करे अगर कोंग्रेस या वामपंथी ५० हजार भी इक्कठे कर लेते तो ये ही चैंनल वाले एक हफ्ते पहले और रेली के एक हफ्ते बाद तक मंहगाई सीरिज चलाते और इनके गुणगान का भोपू बजाते रहते क्योंकि सब के सब बीके हुए है कहते है हम सच दिखाते है और सच दिखने की हिम्मत नहीं है जिस बात पर इनको फक्र होना चाहिए था ''कम से कम जनता की सुध लेते हुए गडकरी जी के आव्हान पर लाखो की संख्या में लोग दिल्ली पहुंचे ''ये सच में फक्र की बात है पर मित्रो फक्र तो दूर की बात है इन्होने सच को भी छिपाने की कोशिश की ।
सारा भारत आज मंहगाई युद्ध की तरह लड़ रहा है देश में अनगिनत चुनाव लड़ने वाली पार्टिया भरी पड़ी है क्या आज तक किसी ने सुध ली नहीं और अगर कोई ले तो ये मीडिया उसका कचूमर निकल देती है
दिसम्बर में गडकरी जी का राष्ट्रिय अध्यक्ष के तोर पर आना और मात्र तीन माह के छोटे से समय में इतनी बड़ी संख्या में रामलीला ग्राउंड में पहुचना अपने आप में तारीफ वाला काम था जो बी जे पी और रणनीतिकारो (रामलाल जी , अनंत कुमार,धर्मेन्द्र प्रधान,विजय गोयल ,आरती महरा ) और दिल्ली से ओ पी कोहली ,विजय शर्मा ,नन्द किशोर गर्ग ,रमेश बिधुदी , बिजेंदर गुप्ता ,जो पिछले एक महीने से relii पूर्व योजना और पूर्ण योजना के लिए अपनी रातो की नींद और अपना काम छोड़कर इसी में लगे थे सिर्फ इस लिए क्योंकि उन्हें देश में मंगाई की मार झेल रहे एक एक आदमी का दुःख दर्द समझ आता है
मीडिया को पूरी रेली के दोरान कोई कमी नजर नहीं आई हर जगह कार्यकर्त्ता बड़ी सादगी के साथ इक्कठे होकर आगे बढ़ रहे थे कोई नुक्सान नहीं सरकारी चीजो का (५ आदमी इक्कठे बस में जाये वो भी स्टाफ चलाते है) और लाखो में आने पर भी कोई गड़बड़ नहीं की ये शायद साबित करने के लिए काफी है की देश में अगर कोई अनुशाषित पार्टी है तो वो बी जे पी है और ये अनुशाशन आर एस एस के सिवा कंही और से मिलता नहीं दीखता बी जे पी कार्यकर्ताओ ने साबित किया की वे अनुशाषित भी है और संगठित भी मगर नहीं मीडिया को ये सब दिखाई नहीं देगा आँखों पर पट्टी है ऐड की क्या करे ..........न्याय की मूर्ति के हाथ में तराजू और आँखों पर पट्टी होती है और मीडिया की कोई मूर्ति बनेगी तो कंधे पर कैमरा और आँखों पर पट्टी लगी होगी
मीडिया वालो पर शर्म आती है जो अपने आप को लोकतंत्र का चोथा स्तम्भ कहते है और काम ये करते है अगर इसी पर व्यंग करू तो कुछ ऐसे होगा ........
सोनिया गाँधी(गब्बर सिंह)-कितने आदमी थे
मीडिया कर्मी(साम्भा )-सर्कार लाखो
सोनिया -फिर भी गलत खबर लिए वापस आ गए थू धिक्कार है तुम पर
शायद यही सोच रहे थे तभी उनको मोका मिला जो किसी के साथ भी हो सकता है आखिर इन्सान हाड मांस का पुतला है की गडकरी जी को चक्कर आ गए बस फिर क्या था जो मीडिया शुरू हुआ है मानो मीडिया के जान में जान आ गयी हो लगे चैनल में बी जे पी नेताओ को कोसने ''ये तो सुविधा भोगी नेता है'' जाने क्या क्या
लेकिन सच बात तो ये है जो मैसेज बी जे पी और गडकरी जी पुरे देश की जनता को देना चाहते थे वो देने में वो सफल रहे और मीडिया जो मैसेज देना चाहती थी उसमे वो सफल नहीं हो सकी .......दोस्तों ऐसे नेता जो लोकहित में रात रात जाग कर काम करने की छह रखते है भगवन उन्हें और लम्बी उम्र दे ..........

Sunday, February 7, 2010

बेचारी मुंबई - राहुल का अंहकारी दौरा

२१५०० पोलिस जवान, जमीं से लेकर आसमान तक नजरे फैलाये ब्लैक काट कमांडो ,जिन रास्तो से राहुल{युवराज} गुजरे उन रास्तो पर धारा १४४ ,उन रास्तो पर दुकाने बंद लोगो की सघन तलाशी ,चार लोगो का एक साथ खड़ा होना मुश्किल ,और युवराज के पैरो में पड़े सारे महाराष्ट्र सर्कार के मंत्री ये नजर हम सभी ने टी व् पर देखा और महाराष्ट्र के लोगो ने भोगा लगातार घंटो तक किसी दिन दिल्ली में वी आई पी रूट में फंसे लोगो को देखो और उन पोलिस वालो को जो वंहा खड़े होते है सभी के चहरे ये बताते है की सभी फसे हुए है तो राहुल जैसे पड़े लिखे नेता को आखिर क्या जरुरत आन पड़ी थी मुंबई की पुलिस और पब्लिक तथा नेताओ को फ़साने की मुझे कुछ वजह लगती है आपको बतात हू .

१]अंहकार-शिव सेना की ओकात दिखने का अंहकार अगर सच्चाई में राहुल खुद को उत्तर भारतीयों का हितेषी मानते तो अपने विचारो के कारन ही शिव सेना को निचा दिखा ही सकते थे लेकिन विचारो में इतना अमली जामा नहीं दिख पाता शिव सेना के तो विचार ही राहुल के सामने बोने हो जाते क्योंकि भारत का हर आदमी वसुधेव कुतुम्भ्कम के विचार से ओत प्रोत है किसी का दिल ताकत से नहीं विचरो से जीता जाता है अगर ऐसा नहीं होता तो गांधी जी और विवेकानंद जी के साथ भी सेना सर्कार की ताकत होती

]बिहार का आनेवाला चुनाव- नजदीक में ही बिहार का चुनाव भी आने वाला है शायद वो कारन हो क्योंकि वोट भी तो चाहिए बिना वोटों के पार्टी को कौन पूछने वाला होगा मुंबई में उत्तर भारतीयों के हमले बार - बार हो रहे थे तब भी राहुल अपने पारिवारिक मीटर की शादी में शरीक होने गए थे चुप चाप गए चुप - चाप लौट आये क्योंकि तब बिहार नहीं महाराष्ट्र चुनाव नजदीक था तब राहुल जी को मराठी वोट से और शिव सेना में काटने की फिकर थी

]चकर्वर्ति राजाका अश्वमेघ यग्य - राजाओ की कथाओ में सुना है की चकर्वर्ति राजा के अश्व्मेग यग्य के अश्व को अगर कोई पकड़ लेता था तो राजा अपनी सेना का पूरा लोह लश्कर लेकर उस व्यक्ति से युद्ध की ललकार देता था मुझे कल का नजर कुछ वैसा ही लगा आज कांग्रेस चक्रवर्ती राजा के जैसी है लगातार दो बार सत्ता में जो आई और उसका अश्व और कोई नहीं राहुल जी है भला राहुल जी और कांग्रेस ये कैसे सहन कर सकते है की राहुल की तिप्न्ही के बाद कोई कुछ कहे तो मुझे ये सारा नजर कुछ वैसा ही लगा

राहुल जी चाटुकारों को पसंद नहीं करते फिर वंहा के गृह मंत्री ने चाटुकारिता की हिमाकत क्यों और कैसे की असल में कोंग्रेस का इतिहास ही रहा है ऐसा जवाहर जी, इंदिरा जी ,संजय,राजीव, सभी की एक चाटुकारों की टोली रहती ही थी तो भला राहुल जी कैसे बच पाते देश के अलग अलग हिस्सों में स्कूल कालेज के युओवाओ से मिलकर बात करके जो होसला उन्होंने दिखाया वो कल के अंहकारी दौरे से कुछ हिल सा गया है काश राहुल इस राजनेतिक कीचड़ में रहकर इन सब कमियों से ऊपर रह पाते चलो अच्छा है उनमे राजनेताओ जैसी कमिय मोजूद है नहीं तो वो इंसान से देवता बन जाते और लोग उनकी पूजा करते क्योंकि इसी देश में पत्थर भी पूजे जाते है